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Monday, 12 June 2017

क्या भविष्य में बच पाएगा केदारनाथ का मंदिर...

आश्चर्य चकित कर देने वाली प्रस्तुति क्या चार सो साल तक बर्फ में दबा रहा केदारनाथ मंदिर...पुनः प्रस्तुत


केदारनाथ ज्योतिर्लिंग-
केदारनाथ स्थित ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में आता है। यह उत्तराखंड राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है। बाबा केदारनाथ का यह मंदिर समुद्र तल से 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। केदारनाथ का वर्णन स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है। यह तीर्थ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।
अगर वैज्ञानिकों की मानें तो केदारनाथ का मंदिर 400 साल तक बर्फ में दबा रहा था, लेकिन फिर भी वह सुरक्षित बचा रहा। 13वीं से 17वीं शताब्दी तक यानी 400 साल तक एक छोटा हिमयुग (Little Ice Age) आया था जिसमें हिमालय का एक बड़ा क्षेत्र बर्फ के अंदर दब गया था।
वैज्ञानिकों के मुताबिक केदारनाथ मंदिर 400 साल तक बर्फ में दबा रहा फिर भी इस मंदिर को कुछ नहीं हुआ, इसलिए वैज्ञानिक इस बात से हैरान नहीं है कि ताजा जल प्रलय में यह मंदिर बच गया।
देहरादून के वाडिया इंस्टीट्यूट के हिमालयन जियोलॉजिकल वैज्ञानिक विजय जोशी ने कहा कि 400 साल तक केदारनाथ के मंदिर के बर्फ के अंदर दबे रहने के बावजूद यह मंदिर सुरक्षित रहा, लेकिन वह बर्फ जब पीछे हटी तो उसके हटने के निशान मंदिर में मौजूद हैं जिसकी वैज्ञानिकों ने स्टडी की है उसके आधार पर ही यह निष्कर्ष निकाला गया है।
जोशी कहते हैं कि 13वीं से 17वीं शताब्दी तक यानी 400 साल तक एक छोटा हिमयुग आया था जिसमें हिमालय का एक बड़ा क्षेत्र बर्फ के अंदर दब गया था। मंदिर ग्लैशियर के अंदर नहीं था बल्कि बर्फ के ही दबा था।
वैज्ञानिकों के अनुसार मंदिर की दीवार और पत्थरों पर आज भी इसके निशान हैं। ये निशान ग्लैशियर की रगड़ से बने हैं। ग्लैशियर हर वक्त खिसकते रहते हैं। वे न सिर्फ खिसकते हैं बल्कि उनके साथ उनका वजन भी होता है और उनके साथ कई चट्टानें भी, जिसके कारण उनके मार्ग में आई हर वस्तुएं रगड़ खाती हुई चलती हैं। जब 400 साल तक मंदिर बर्फ में दबा रहा होगा तो सोचिए मंदिर ने इन ग्लैशियर के बर्फ और पत्थरों की रगड़ कितनी झेली होगी।
वैज्ञानिकों के मुताबिक मंदिर के अंदर भी इसके निशान दिखाई देते हैं। बाहर की ओर दीवारों के पत्थरों की रगड़ दिखती है तो अंदर की ओर पत्थर समतल हैं, जैसे उनकी पॉलिश की गई हो। 
मंदिर का निर्माण : विक्रम संवत् 1076 से 1099 तक राज करने वाले मालवा के राजा भोज ने इस मंदिर को बनवाया था, लेकिन कुछ लोगों के अनुसार यह मंदिर 8वीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने बनवाया था। बताया जाता है कि मौजूदा केदारनाथ मंदिर के ठीक पीछे पांडवों ने एक मंदिर बनवाया था, लेकिन वह मंदिर वक्त के थपेड़ों की मार नहीं झेल सका।भगवान श्री कृष्ण के कहने पर पांण्डव शिव जी को मनाने चल पड़े। पांण्डवों द्वारा अपने गुरूओं एवं सगे-संबंधियों का वध किये जाने से भगवान शिव जी पांण्डवों से नाराज हो गये थे । गुप्त काशी में पांण्डवों को देखकर भगवान शिव वहां से विलीन हो गये और उस स्थान पर पहुंच गये जहां पर वर्तमान में केदारनाथ स्थित है। लेकिन पांण्डव भगवान शिव को हर हाल में मनाना चाहते थे। शिव जी का पीछा करते हुए पांण्डव केदारनाथ पहुंच गये। इस स्थान पर पांण्डवों को आया हुए देखकर भगवान शिव ने एक बैल का रूप धारण किया और इस क्षेत्र में चर रहे बैलों के झुंण्ड में शामिल हो गये। पांण्डवों ने बैलों के झुंण्ड में भी शिव जी को पहचान लिया तो शिव जी बैल के रूप में ही धरती में समाने लगे। भगवान शिव को बैल के रूप में धरती में समाता देख भीम ने कमर से कसकर पकड़ लिया। 
पांण्डवों की सच्ची श्रद्धा को देख भगवान शिव प्रकट हुए और पांण्डवों को पापों से मुक्त कर दिया। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव जी जब बैल के रूप में धरती में समा रहे थे तो उनका सिर काठमांडू स्थित पशुतिनाथ में प्रकट हुआ। अब बहां पशुपतिनाथ का भव्य मंदिर है। इसलिए केदारनाथ और पशुपतिनाथ को मिलाकर एक ज्योर्तिलिंग भी कहा जाता है। केदरनाथ में बैल के पीठ रूप में शिवलिंग की पूजा होती है जबकि पशुपतिनाथ में बैल के सिर के रूप में शिवलिंग को पूजा जाता है। 
वैसे गढ़वाल ‍विकास निगम अनुसार मौजूदा मंदिर 8वीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने बनवाया था। यानी छोटा हिमयुग का दौर जो 13वीं शताब्दी में शुरू हुआ था उसके पहले ही यह मंदिर बन चुका था।
लाइकोनोमेट्री डेटिंग : 
वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने केदारनाथ इलाके की लाइकोनोमेट्री डेटिंग भी की।जवाब लाइकेन में छिपा है: कवक (फंजाई) और शैवाल (एल्गी) के मेल से सैकड़ों वर्षों में धीरे-धीरे पनपा यह पौधा बेहद ठंडे मौसम में जीवित रह सकता है. घाटी में ग्लेशियर के खिसकने के बाद बचे चट्टानी अवशेषों पर उपजे लाइकेन के अध्ययन से हमें बीते समय में ग्लेशियरों की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली. ऐसे कई सबूत मिले जिसे देखकर हम हैरान रह गए कि मंदिर 14वीं सदी के मध्य से सन् 1748 तक की करीब 400 साल की अवधि के दौरान एक विशालकाय बर्फ के पहाड़ तले दबा था 
जोशी ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि लाखों साल पहले केदारनाथ घाटी बनी है चोराबरी ग्लैशियर के पीछे हटने से। जब ग्लैशियर पीछे हटते हैं तो वे रोड रोलर की तरह अपने नीचे की सारी चट्टानों को पीस देते हैं और साथ में बड़ी-बड़ी चट्टानों के टुकड़े छोड़ जाते हैं।
जोशी कहते हैं कि ऐसी जगह में मंदिर बनाने वालों की एक कला थी। उन्होंने एक ऐसी जगह और एक ऐसा सेफ मंदिर बनाया कि आज तक उसे कुछ नुकसान नहीं हुआ। लेकिन उस दौर के लोगों ने ऐसी संवेदनशील जगह पर आबादी भी बसने दी तो स्वाभाविक रूप से वहां नुकसान तो होना ही था।
मजबूत है केदारनाथ का मंदिर : वैज्ञानिक डॉ. आरके डोभाल भी इस बात को दोहराते हैं। डोभाल कहते हैं कि मंदिर बहुत ही मजबूत बनाया गया है। मोटी-मोटी चट्टानों से पटी है इसकी दीवारें और उसकी जो छत है वह एक ही पत्थर से बनी है।
85 फीट ऊंचा, 187 फीट लंबा और 80 फीट चौड़ा है केदारनाथ मंदिर। इसकी दीवारें 12 फीट मोटी है और बेहद मजबूत पत्थरों से बनाई गई है। मंदिर को 6 फीट ऊंचे चबूतरे पर खड़ा किया गया है। यह हैरतअंगेज है कि इतने भारी पत्थरों को इतनी ऊंचाई पर लाकर तराशकर कैसे मंदिर की शक्ल ‍दी गई होगी।केदारनाथ मंदिर को जिसने बनवाया, जिन कारीगरों-मिस्त्रियों ने इसकी सरंचना सोची उन्होंने नींव के नाते चट्टान और फिर कंगूरे की संरचना तक में यह हिसाब बाकायदा लगाया कि यदि बाढ़ और बर्फानी तूफान आया तो मंदिर कैसे बचेगा? और यह सोचा गया था हजार साल पहले....... जानकारों का मानना है कि पत्थरों को एक-दूसरे में जोड़ने के लिए इंटरलॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया होगा। यह मजबूती और तकनीक ही मंदिर को नदी के बीचोबीच खड़े रखने में कामयाब हुई है।
क्या भविष्य में बच पाएगा केदारनाथ का मंदिर...
केदार घाटी : केदानाथ धाम और मंदिर तीन तरफ पहाड़ों से घिरा है। एक तरफ है करीब 22 हजार फुट ऊंचा केदारनाथ तो दूसरी तरफ है 21 हजार 600 फुट ऊंचा खर्चकुंड और तीसरी तरफ है 22 हजार 700 फुट ऊंचा भरतकुंड। न सिर्फ तीन पहाड़ बल्कि पांच ‍नदियों का संगम भी है यहां। मं‍दाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी। इन नदियों में से कुछ को काल्पनिक माना जाता है। इस इलाके में मंदाकिनी ही स्पष्ट तौर पर दिखाई देती है। यहां सर्दियों में भारी बर्फ और बारिश में जबरदस्त पानी।
भविष्य की आशंका : दरअसल केदारनाथ का यह इलाका चोराबरी ग्लैशियर का एक हिस्सा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लैशियरों के लगातार ‍पिघलते रहने और चट्टानों के खिसकते रहने से आगे भी इस तरह का जलप्रलय या अन्य प्राकृतिक आपदाएं जारी रहेंगी।
पुराणों की भविष्यवाणी : पुराणों की भविष्यवाणी अनुसार इस समूचे इलाके के तीर्थ लुप्त हो जाएंगे। माना जाता है कि जिस दिन नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे, बद्रीनाथ का मार्ग पूरी तरह बंद हो जाएगा। भक्त बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएंगे। उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा इस बात की ओर इशारा करती है। पुराणों अनुसार आने वाले कुछ वर्षों में वर्तमान बद्रीनाथ धाम और केदारेश्वर धाम लुप्त हो जाएंगे और वर्षों बाद भविष्य में भविष्यबद्री नामक नए तीर्थ का उद्गम होगा।

Sunday, 11 June 2017

#👍*MEDICAL FITNESS*💐#

*MEDICAL FITNESS*

*PREVENTION IS* *BETTER THAN CURE*

____MEDICAL FITNESS____

*BLOOD PRESSURE*
120/80 -- Normal
130/85 -- Normal (Control)
140/90 -- High
150/95 -- V.High
*PULSE*
72 per minute (standard)
60 -- 80 p.m. (Normal)
40 -- 180 p.m. (abnormal)
*TEMPERATURE*
98.4 F Normal
99.0 F Above (Fever)

*BLOOD GROUP*
*COMPATIBILITY*

What’s Your Type and how common is it?
*O+* 1 in 3 37.4% (Most common)
*A+* 1 in 3 35.7%
*B+* 1 in 12 8.5%
*AB+* 1 in 29 3.4%
*O-* 1 in 15 6.6%
*A-* 1 in 16 6.3%
*B-* 1 in 67 1.5%
*AB-* 1 in 167 .6%
(Rarest)
*Compatible Blood Types*
O- can receive *O-*
O+ can receive *O+, O-*
A- can receive *A-, O-*
A+ can receive *A+, A-, O+, O-*
B- can receive *B-, O-*
B+ can receive *B+, B-, O+, O-*
AB- can receive *AB-, B-, A-, O-*
AB+ can receive *AB+, AB-, B+, B-, A+, A-, O+, O-*
This is an important message which can save a life! A life could be saved...
What is your blood group ?
Share the fantastic information..
*EFFECT OF WATER*

We Know - Water is
important but never tried to know about the SPECIAL TIMES one has to drink it.. !!!
*DO YOU KNOW ?*
Drinking 1 Glass of Water at the Right Time Maximizes its effectiveness on the Human Body;
*1 Glass of Water*
after waking up - helps to
activate internal organs..
*1 Glass of Water*
30 Minutes before a Meal -
helps digestion..
*1 Glass of Water*
before taking a Bath - helps
lower your blood pressure.
*1 Glass of Water*.
before going to Bed - avoids
STROKE or Heart Attack.
*👍When someone shares something of value with you and you benefit from it,💐*
*🙏🏽You have a moral*
*obligation to share*
Please forward to CONTACTS
❣❣❣🙏🏽🙏🏽🙏🏽❣❣❣

#Secure-Health#प्रतिदिन क्या करें#

*1.* प्रतिदिन 10 से 30 मिनट टहलने की आदत बनायें.
चाहे समय ना हो तो घर मे ही टहले , टहलते समय चेहरे पर मुस्कराहट रखें.


*Secure Health*

🌟 *2.* प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट चुप रहकर बैठें.

*Secure Health*

🌟 *3.* पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा पुस्तकें पढ़ें.क्या करें

*Secure Health*

🌟 *4.* 70 साल की उम्र से अधिक आयु के बुजुर्गों और 6 साल से कम आयु के बच्चों के साथ भी कुछ समय व्यतीत करें. D

*Secure Health*

🌟 *5.* प्रतिदिन खूब पानी पियें.

*Secure Health*

🌟 *6.* प्रतिदिन कम से कम तीन बार ये सोचे की मैने आज कुछ गलत तो नही किया.

*Secure Health*

🌟 *7.* गपशप पर अपनी कीमती ऊर्जा बर्बाद न करें.

*Secure Health*

🌟 *8.* अतीत के मुद्दों को भूल जायें, अतीत की गलतियों को अपने जीवनसाथी को याद न दिलायें.

*Secure Health*

🌟 *9.* एहसास कीजिये कि जीवन एक स्कूल है और आप यहां सीखने के लिये आये हैं. जो समस्याएं आप यहाँ देखते हैं, वे पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं.

*Secure Health*

🌟 *10.* एक राजा की तरह नाश्ता, एक राजकुमार की तरह दोपहर का भोजन और एक भिखारी की तरह रात का खाना खायें.

*Secure Health*

🌟 *11.* दूसरों से नफरत करने में अपना समय व ऊर्जा बर्बाद न करें. नफरत के लिए ये जीवन बहुत छोटा है.

*Secure Health*

🌟 *12.* आपको हर बहस में जीतने की जरूरत नहीं है, असहमति पर भी अपनी सहमति दें.

*Secure Health*

🌟 *13.* अपने जीवन की तुलना दूसरों से न करें.

*Secure Health*


🌟 *14.* गलती के लिये गलती करने वाले को माफ करना सीखें.

*Secure Health*

🌟 *15.* ये सोचना आपका काम नहीं कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं.

*Secure Health*

🌟 *16.* समय ! सब घाव भर देता है.

*Secure Health*

🌟 *17.* ईर्ष्या करना समय की बर्बादी है. जरूरत का सब कुछ आपके पास है.

*Secure Health*

🌟 *18.* प्रतिदिन दूसरों का कुछ भला करें.

*Secure Health*

🌟 *19.* जब आप सुबह जगें तो अपने माता-पिता को धन्यवाद दें, क्योंकि माता-पिता की कुशल परवरिश के कारण आप इस दुनियां में हैं.

*Secure Health*

🌟 *20.* हर उस व्यक्ति को ये संदेश शेयर करें जिसकी आप परवाह करते हैं.
.l💞🌷🌹🙏🏻🙏🏻

Saturday, 10 June 2017

#स्ट्रोक की पहचान --और इस से पहले हमेशा याद रखिये ----STR#

डा महेश सिन्हा की एक बहुत उपयोगी पोस्ट ---
मस्तिष्क आघात के मरीज़ को कैसे पहचानें? 
मस्तिष्क आघात --जी वही, जिसे कईं बार ब्रेन-स्ट्रोक भी कह दिया जाता है अथवा आम भाषा में दिमाग की नस फटना या ब्रेन-हैमरेज भी कह देते हैं।
इस के बारे में पोस्ट डाक्टर साहब लिखते हैं ---- 
एक पार्टी चल रही थी, एक मित्र को थोड़ी ठोकर सी लगी और वह गिरते गिरते संभल गई और अपने आस पास के लोगों को उस ने यह कह कर आश्वस्त किया कि सब कुछ ठीक है, बस नये बूट की वजह से एक ईंट से थोड़ी ठोकर लग गई थी। (आस पास के लोगों ने ऐम्बुलैंस बुलाने की पेशकश भी की).
साथ में खड़े मित्रों ने उन्हें साफ़ होने में उन की मदद की और एक नई प्लेट भी आ गई। ऐसा लग रहा था कि इन्ग्रिड थोड़ा अपने आप में नहीं है लेकिन वह पूरी शाम पार्टी तो एकदम एन्जॉय करती रहीं। बाद में इन्ग्रिड के पति का लोगों को फोन आया कि कि उसे हस्पताल में ले जाया गया लेकिन वहां पर उस ने उसी शाम को दम तोड़ दिया।
दरअसल उस पार्टी के दौरान इन्ग्रिड को ब्रेन-हैमरेज हुआ था --अगर वहां पर मौजूद लोगों में से कोई इस अवस्था की पहचान कर पाता तो आज इन्ग्रिड हमारे बीच होती।
ठीक है ब्रेन-हैमरेज से कुछ लोग मरते नहीं है --लेकिन वे सारी उम्र के लिये अपाहिज और बेबसी वाला जीवन जीने पर मजबूर तो हो ही जाते हैं।
जो नीचे लिखा है इसे पढ़ने में केवल आप का एक मिनट लगेगा ---
स्ट्रोक की पहचान ---
एक न्यूरोलॉजिस्ट कहते हैं कि अगर स्ट्रोक का कोई मरीज़ उन के पास तीन घंटे के अंदर पहुंच जाए तो वह उस स्ट्रोक के प्रभाव को समाप्त (reverse)भी कर सकते हैं---पूरी तरह से। उन का मानना है कि सारी ट्रिक बस यही है कि कैसे भी स्ट्रोक के मरीज़ की तुरंत पहचान हो, उस का निदान हो और उस को तीन घंटे के अंदर डाक्टरी चिकित्सा मुहैया हो, और अकसर यह सब ही अज्ञानता वश हो नहीं पाता।
स्ट्रोक के मरीज़ की पहचान के लिये तीन बातें ध्यान में रखिये --और इस से पहले हमेशा याद रखिये ----STR.
डाक्टरों का मानना है कि एक राहगीर भी तीन प्रश्नों के उत्तर के आधार पर एक स्ट्रोक के मरीज की पहचान करने एवं उस का बहुमूल्य जीवन बचाने में योगदान कर सकता है.......इसे अच्छे से पढ़िये और मन में बैठा लीजिए --
S ---Smile आप उस व्यक्ति को मुस्कुराने के लिये कहिए।
T-- talk उस व्यक्ति को कोई भी सीधा सा एक वाक्य बोलने के लिये कहें जैसे कि आज मौसम बहुत अच्छा है।
R --- Raise उस व्यक्ति को दोनों बाजू ऊपर उठाने के लिये कहें।
अगर इस व्यक्ति को ऊपर लिखे तीन कामों में से एक भी काम करने में दिक्कत है , तो तुरंत ऐम्बुलैंस बुला कर उसे अस्पताल शिफ्ट करें और जो आदमी साथ जा रहा है उसे इन लक्षणों के बारे में बता दें ताकि वह आगे जा कर डाक्टर से इस का खुलासा कर सके।
नोट करें ---- स्ट्रोक का एक लक्षण यह भी है --
1. उस आदमी को जिह्वा (जुबान) बाहर निकालने को कहें।
2. अगर जुबान सीधी बाहर नहीं आ रही और वह एक तरफ़ को मुड़ सी रही है तो भी यह एक स्ट्रोक का लक्षण है।
एक सुप्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि अगर इसको पढ़ने वाला इसे आगे दस लोगों को भेजे तो शर्तिया तौर पर आप एक बेशकीमती जान तो बचा ही सकते हैं ....
स्ट्रोक क्या है, क्यों होता है, और इस के लक्षण क्या हैं
मस्तिष्क के ठीक काम करने के लिए यह जरूरी है कि मस्तिष्क में खून की सप्लाई ठीक रहे. इस काम के लिए हमारे मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं (खून की नलिकाएं, blood vessels) का एक जाल (नेटवर्क) है, जिसे वैस्कुलर सिस्टम कहते है. ये रक्त वाहिकाएं मस्तिष्क के हर भाग में आक्सीजन और जरूरी पदार्थ पहुंचाती हैं.
स्ट्रोक में इस रक्त प्रवाह में रुकावट होती है. इस के दो मुख्य कारण हैं:
अरक्तक आघात, इस्कीमिया (ischemia): रक्त का थक्का (clot) रक्त वाहिका को बंद कर सकता है (अधिकाँश स्ट्रोक के केस इस प्रकार के होते हैं)[1]
रक्तस्रावी आघात (हेमरेज, haemorrhage) : रक्त वाहिका फट सकती है
खून सप्लाई में कमी के कुछ कारण
इस रुकावट के कारण हुई हानि इस पर निर्भर है कि मस्तिष्क के किस भाग में और कितनी देर तक रक्त ठीक से नहीं पहुँच पाया. यदि कुछ मिनट तक रक्त नहीं पहुँचता, तो प्रभावित भाग में मस्तिष्क के सेल मर सकते हैं (इस को इनफार्क्ट या रोधगलितांश कहते हैं).
स्ट्रोक से बचने के उपाय
स्ट्रोक होने के बाद व्यक्ति को दुबारा स्ट्रोक होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है. कुछ स्टडीज़ के अनुसार, इलाज न करें तो अगले पांच साल में फिर स्ट्रोक होने की संभावना 25% है, और दस साल में स्ट्रोक होने की संभावना 40% है. इसलिए स्ट्रोक के बाद आगे स्ट्रोक न हो, इस के लिए खास ध्यान रखना होता है.
स्ट्रोक की संभावना कम करने के लिए उपयुक्त दवा लें और उचित जीवन-शैली के बदलाव अपनाएं. उच्च रक्त-चाप (हाइपरटेंशन, हाई बी पी) और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें. डायबिटीज से बचें, या उस पर नियंत्रण रखें. जीवन-शैली बदलाव करें, जैसे कि: सही और पौष्टिक खाना, वजन नियंत्रित रखना, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना (व्यायाम इत्यादि), तम्बाकू सेवन और धूम्रपान बंद करना, तनाव कम करना, और मद्यपान कम करना. डॉक्टर से बात करें, ताकि आपको सही सलाह मिले.
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Thursday, 1 June 2017

#मोबाइल से जुडी कई बातें#


Mobile आज के समय में मोबाइल हर किसी की जिन्दगी का एक महत्वपूर्ण अंग बन चूका है मोबाइल तो सभी इस्तेमाल करते हैं क्या आपको पता है मोबाइल फ़ोन के कुछ ऐसे तथ्य हैं जिनको जानकार आपन दंग रह जायेंगे चलिए जानते हैं मोबाइल के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी 
#मोबाइल से जुडी कई ऐसी बातें जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती लेकिन मुसीबत के वक्त यह मददगार साबित होती है ।#
इमरजेंसी नंबर ---
दुनिया भर में मोबाइल का इमरजेंसी नंबर 112 है । अगर आप मोबाइल की कवरेज एरिया से बाहर हैं
तो 112 नंबर द्वारा आप उस क्षेत्र के नेटवर्क को सर्च कर लें। ख़ास बात यह है कि यह नंबर तब भी काम करता है जब आपका की पैड लौक हो। 
जान अभी बाकी है---
मोबाइल जब बैटरी लो दिखाए और उस दौरान जरूरी कॉल करनी हो, ऐसे में आप *3370# डायल करें । आपका मोबाइल फिर से चालू हो जायेगा और आपका सेलफोन बैटरी में 50 प्रतिशत का इजाफा दिखायेगा। मोबाइल का यह रिजर्व दोबारा चार्ज हो जायेगा जब आप अगली बार मोबाइल को हमेशा की तरह चार्ज करेंगे। 
मोबाइल चोरी होने पर---
मोबाइल फोन चोरी होने की स्थिति में सबसे पहले जरूरत होती है, फोन को निष्क्रिय करने की ताकि चोर उसका दुरुपयोग न कर सके । अपने फोन के सीरियल नंबर को चेक करने के लिए *#06# दबाएँ । इसे दबाते ही आपकी स्क्रीन पर 15 डिजिट का कोड नंबर आयेगा। इसे नोट कर लें और किसी सुरक्षित स्थान पर रखें। जब आपका फोन खो जाए उस दौरान अपने सर्विस प्रोवाइडर को ये कोड देंगे तो वह आपके हैण्ड सेट को ब्लोक कर देगा।
कार की चाभी खोने पर ---
अगर आपकी कार की रिमोट की लेस इंट्री है। और गलती से आपकी चाभी कार में बंद रह गयी है। और दूसरी चाभी घर पर है। तो आपका मोबाइल काम आ सकता है। घर में किसी व्यक्ति के मोबाइल फोन पर कॉल करें। घर में बैठे व्यक्ति से कहें कि वह अपने मोबाइल को होल्ड रखकर कार की चाभी के पास ले जाएँ और चाभी के अनलॉक बटन को दबाये। साथ ही आप अपने मोबाइल फोन को कार के दरवाजे के पास रखें....। दरवाजा खुल जायेगा।
एंड्राइड मोबाइल यूजर के काम के कोड
1. Phone Information, Usage and Battery – *#*#4636#*#*
2. IMEI Number – *#06#
3. Enter Service Menu On Newer Phones – *#0*#
4. Detailed Camera Information –*#*#34971539#*#*
5. Backup All Media Files –*#*#273282*255*663282*#*#*
6. Wireless LAN Test –*#*#232339#*#*
7. Enable Test Mode for Service –*#*#197328640#*#*
8. Back-light Test – *#*#0842#*#*
9. Test the Touchscreen –*#*#2664#*#*
10. Vibration Test –*#*#0842#*#*
11. FTA Software Version –*#*#1111#*#*
12. Complete Software and Hardware Info –*#12580*369#
13. Diagnostic Configuration –*#9090#
14. USB Logging Control –*#872564#
15. System Dump Mode –*#9900#
16. HSDPA/HSUPA Control Menu –*#301279#
17. View Phone Lock Status –*#7465625#
18. Reset the Data Partition to Factory State – *#*#7780#*#*
सेमसंग शॉर्टकट कोड्स व उनसे मिलने वाली जानकारी
1. *2767*3855# - ये कोड आपके फोन को पूरी तरह क्लीन कर देगा साथ ही आपके फोन के सोफ्टवेयर को पुन: स्थापित कर देगा।
2. *#*#34971539#*#* - ये कोड आपको आपके कैमरे की पूरी जानकारी देगा।
3. *#*#7594#*#* - ये कोड आपके पावर बटन की तरह काम करेगा, इस कोड के जरिए आप अपना मोबाइल डायरेक्ट बंद कर सकते है।
4. *#*#0*#*#* - ये कोड LCD टेस्ट के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
5. *#*#0673#*#* OR *#*#0289#*#* - ये कोड आपके मोबाइल का ऑडियो टेस्ट करता है।
6. *#*#2663#*#* - ये कोड आपको आपके मोबाइल का टच स्क्रीन वर्जन बताएगा।
7. *#*#3264#*#* - ये कोड आपको आपके मोबाइल का रेम वर्जन बताएगा।
8. *#*#232331#*#* - इस कोड से आप अपने मोबाइल का ब्लूटूथ टेस्ट कर सकते है।
9. *#*#44336#*#* - इस कोड से आप अपने मोबाइल के समय का निर्माण कर सकते है तथा अपने नम्बरो की सूची भी बदल सकते है
बड़े काम के कोड है इसलिए शेयर करे और दुसरो को भी बताये !

#Our Journey Together is so Short#

#"Our Journey Together is so Short"# 
A beautiful message for all of us....Take a minute please

 Life’s journey is too short than for you to go about moody, grumpy or with a heavy heart. You must therefore fight off and overcome whatever the devil has been using against you to make you unhappy.
A young lady sat in a bus. At the next stop a loud and grumpy old lady came and sat by her. She squeezed into the seat and bumped her with her numerous bags. 
The person sitting on the other side of the young lady got upset, asked her why she did not speak up and say something.
The young lady responded with a smile: 
"It is not necessary to be rude or argue over something so insignificant, the journey together is so short. I get off at the next stop."
This response deserves to be written in golden letters:
*"It is not necessary to argue over something so insignificant, our journey together is so short"*
If each one of us realized that our time here is so short; that to darken it with quarrels, futile arguments, not forgiving others, discontentment and a fault finding attitude would be a waste of time and energy.
As a child of God, you should emulate Christ Jesus and win others to Him with your Christlike behaviour at home, at school, in your place of work, at office, in your business and wherever you find yourself.
It is not necessary to argue over something so insignificant, our journey together is so short.
If each one could realise that our passage down here has such a short duration, to darken it with futile arguments would be a waste of time and energy.
Did someone break your heart? *Be calm, the journey is so short.*
Did someone betray, bully, cheat or humiliate you? *Be calm, forgive, the journey is so short.*
Whatever troubles anyone brings us, let us remember that *our journey together is so short.*
No one knows the duration of this journey. No one knows when their stop will come. *Our journey together is so short.*

Let us cherish friends and family. Let us be respectful, kind and forgiving to each other. Let us be filled with gratitude and gladness. 
If I have ever hurt you, I ask for your forgiveness. If you have ever hurt me, you already have my forgiveness. 
After all, *Our Journey Together is so Short!*
Always remember: The journey down here is so short!!! We will spend longer time together in heaven, so do all in your power to make it to heaven. I pray that the Lord will count each one of us worthy in His Kingdom in Jesus name. Amen.

#Sun-Upasana# सूर्योपासना से क्या लाभ -सूर्य अर्घ्य देने की विधि


सूर्योपासना(Sun Upasana) से क्या लाभ मिलता है।

सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परम्परा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। छठ ब्रत में उगते हुए सूर्य को तथा अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यदि आपके जन्मकुंडली में सूर्य ग्रह नीच के राशि तुला में है तो अशुभ फल से बचने के लिए प्रतिदिन सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। वही यदि सूर्य किसी अशुभ भाव का स्वामी होकर सुबह स्थान में बैठा है तो सूर्योपासना करनी चाहिए। साथ ही जिनकी कुंडली में सूर्यदेव अशुभ ग्रहो यथा शनि, राहु-केतु, के प्रभाव में है तो वैसे व्यक्ति को अवश्य ही प्रतिदिन नियमपूर्वक सूर्य को जल अर्पण करना चाहिए।

निम्न वैदिक मन्त्र से प्रतिदिन प्रातः एवं सायं संध्या में सूर्य देवता को अर्ध्य देने उपरान्त अन्जुलिबद्ध होकर प्रार्थना की जाती है -

तच्चक्षुर्देवहितं पुरस्ताच्छुक्रमुच्चरत् |
पश्येम शरदः शतं जीवम शरदः शतग्वँशृणुयाम
शरदः शतं प्र ब्रवाम् शरदः शतमदीनाः स्याम
शरदः शतं भूयश्च शरदः शतात् || यजु. ३६.२४||

पदार्थ :- हे परमेश्वर ! आप जो (देवहितम्) विद्वानों के लिये हितकारी( शुक्रम्) शुद्ध ( चक्षुः) नेत्र के तुल्य सबको दिखाने वाले ( पुरस्तात्) पूर्वकाल अर्थात् अनादि काल से ( उत् , चरत् ) उत्कृष्टता के साथ सबके ज्ञाता हैं ( तत् ) उस चेतन ब्रह्म आपको ( शतम् , शरदः) सौ वर्ष तक ( पश्येम ) देखें ( शतम् , शरदः ) सौ वर्ष तक ( जीवेम्) प्राणोंको धारण करें जीवें ( शतम् , शरदः ) सौ वर्ष पर्यन्त ( शृणुयाम्) शास्त्रों वा मङ्गल वचनों को सुनें ( शतम्, शरदः ) सौ वर्ष पर्यन्त ( प्रब्रवाम्) पढ़ावें वा उपदेश करें ( शतम् , शरदः ) सौ वर्ष पर्यन्त ( अदीनाः) दीनता रहित ( स्याम्) हों ( च ) और ( शतात् , शरदः ) सौ वर्ष से ( भूयः )अधिक भी देखें जीवें सुनें पढ़ें उपदेश करें और अदीन रहें |
भावार्थ :- हे परमेश्वर ! आप की कृपा आउर आपके विज्ञान से आपकी रचना को देखते हुए आप के साथ युक्त नीरोग और सावधान हुए हम लोग समस्तैन्द्रियों से युक्त सौ वर्ष से अधिक जेवें सत्य शास्त्रों और आप के गुणों को सुनें वेदादि को पढ़ावें सत्य का उपदेश करें कभी किसी वस्तु के विना पराधीन न अहों सदैव स्वतन्त्र हुए निरन्तर आनन्द भोगें और दूसरों को आनन्दित करें |
Sun Upasana – सूर्य अर्घ्य देने की विधि
*सूर्योदय के प्रथम किरण में अर्घ्य देना सबसे उत्तम माना गया है।
*सर्वप्रथम प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व नित्य-क्रिया से निवृत्त्य होकर स्नान करें।
*उसके बाद उगते हुए सूर्य के सामने आसन लगाए।
*पुनः आसन पर खड़े होकर तांबे के पात्र में पवित्र जल लें।
*रक्तचंदन आदि से युक्त लाल पुष्प, चावल आदि तांबे के पात्र में रखे जल या हाथ की अंजुलि से तीन बार जल में ही मंत्र पढ़ते हुए जल अर्पण करना चाहिए।
*जैसे ही पूर्व दिशा में सूर्योदय दिखाई दे आप दोनों हाथों से तांबे के पात्र को पकड़कर इस तरह जल अर्पण करे की सूर्य तथा सूर्य की किरण जल की धार से दिखाई दें।
*ध्यान रखें जल अर्पण करते समय जो जल सूर्यदेव को अर्पण कर रहें है वह जल पैरों को स्पर्श न करे।
*सम्भव हो तो आप एक पात्र रख लीजिये ताकि जो जल आप अर्पण कर रहे है उसका स्पर्श आपके पैर से न हो पात्र में जमा जल को पुनः किसी पौधे में डाल दे।
*यदि सूर्य भगवान दिखाई नहीं दे रहे है तो कोई बात नहीं आप प्रतीक रूप में पूर्वाभिमुख होकर किसी ऐसे स्थान पर ही जल दे जो स्थान शुद्ध और पवित्र हो।
*जो रास्ता आने जाने का हो भूलकर भी वैसे स्थान पर अर्घ्य (जल अर्पण) नहीं करना चाहिए।
*पुनः उसके बाद दोनों हाथो से जल और भूमि को स्पर्श करे और ललाट, आँख कान तथा गला छुकर भगवान सूर्य देव को एकबार प्रणाम करें।

आने वाले पर्यावरण दिवस के पूर्व समाज को समर्पित | हम भारतीय प्रतिदिन पर्यावरण दिवस इस मन्त्र की दृष्टि में मनाते हैं | भारतीय पद्धतियों को अपनाएँ और सर्वदा सुखी रहें|